खरीफ प्याज की खेती को बढ़ावा देने के लिए केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान( CISH), रहमानखेड़ा, लखनऊ ने पहल की है।संस्थान ने इस प्रजाति को लगाने वाले किसान के खेत में ही प्रदर्शन के साथ किसानों के साथ परिचर्चा का आयोजन किया है। संस्थान के निदेशक डॉ शैलन्द्र राजन का दावा है कि इसकी खेती से बाजार में किसानों को अच्छी कीमत मिलेगी।
प्रतीकात्मक तस्वीर

कृषि बड़े मुनाफे का सौदा साबित हो सकती है, जब किसान सही तकनीक और परम्परागत कृषि के साथ उचित सामन्जस्य स्थापित करने में कामयाब हो जाए। कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है प्याज की खेती के साथ। 

प्याज की खेती अमूमन मार्च से अप्रैल के बीच की जाती है। अप्रैल में एक साथ प्याज की आवक होने के कारण मंडियों में दाम बहुत कम मिलते हैं।प्याज के भंड़ारण में भी खासा नुकसान होता है, जिससे हर महीने इसके दाम तेज होते जाते हैं। खासकर दिसम्बर और जनवरी के बीच प्याज की कीमतें सबसे ज्यादा होती हैं। बरसात के मौसम के साथ-साथ प्याज की कीमतें बढ़ने लगती हैं।

अधिक तापमान और नमी वाले वातावरण में  प्याज सड़ने के कारण उसे ज्यादा दिन भंडारित करना कठिन होता है।यही वजह है जिसके कारण दाम में बढ़ोतरी अगले फसल आने तक होती ही रहती है| आमतौर पर उत्तर भारत में प्याज की फसल मार्च-अप्रैल में तैयार होती है और किसान को अच्छा दाम भी नहीं मिल पाता है ।

 केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान ने किसानों के ही खेत में खरीफ प्याज का सफलतापूर्वक उत्पादन उस समय किया जब बढ़ती हुई मांग और सीमित आपूर्ति के कारण बाजार में दाम अधिक हैं| महाराष्ट्र में किसान पहले से ही खरीफ प्याज उत्पादन करके मुनाफा कमा रहे हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश और इससे लगे राज्यों में इसके प्रति कम जागरूकता है।

उपयुक्त जलवायु परिस्थितियों और उपलब्ध किस्मों के बावजूद, उप-उष्णकटिबंधीय परिस्थितियों में किसान इस तकनीक के बारे में अनभिज्ञ है। सही जानकारी ना होने के अभाव में अधिकांश किसान खरीफ प्याज की फसल का उत्पादन नहीं कर रहे हैं।खरीफ प्याज के प्रति किसानों के बीच जागरूकता के लिए केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान ने लखनऊ की परिस्थितियों में किसानों के खेतों में प्याज का उत्पादन करके प्रौद्योगिकियों को लोकप्रिय बनाने की पहल की है।

 इस प्रक्रिया में किसानों को काकोरी और मॉल ब्लॉक के विभिन्न गांवों से अनुसूचित वर्ग के किसानों को चुना गया और उन्हें प्याज के सेट रोपण के लिए मानसून के दौरान उपलब्ध कराया गया। 15 अगस्त के बाद सेट के रोपण के परिणामस्वरूप अब प्याज की फसल तैयार है।

सीआईएसएच के निदेशक डॉ. शैलेन्द्र राजन ने बताया कि संस्थान ने खेत में प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन करने के साथ किसानों को उचित जानकारी देने के लिए 8 जनवरी 2021  को एक कार्यक्रम का आयोजन किया है। यह आयोजन लखनऊ जिले के काकोरी ब्लॉक के काकराबाद  में होगा। जहां के किसान राजेश पुष्कर के खेत में खरीफ प्याज की खेती का प्नदर्शन किसान देखेंगे, साथ किसान वैज्ञानिकों के साथ खुली चर्चा भी कर सकेंगे। इसमें संस्थान से जुड़े अन्य अनुसूचित जाति के किसानों को भी आमंत्रित किया गया है, जिससे उचित खेती की परिस्थितियों के साथ किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए खुला वातावरण हासिल हो सके।

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