विवादित बयान देकर घिरे नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत, आर्थिक सुधार की चुनौतियों पर बात करते हुए कहा कि भारत में कुछ ज्यादा ही लोकतंत्र है, जिसकी वजह से सुधार की राह आसान नहीं होती।

एक तरफ किसानों के आंदोलन से सरकार हलकान हुआ जा रही है, इसी बीच नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने आर्थिक सुधारों को लेकर विवादित बयान देकर सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। देश को वैश्विक स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की वकालत करते हुए अमिताभ कांत ने कहा कि भारत में अधिक लोकतंत्र होने की वजह से कई तरह के आर्थिक सुधारों और नीतियों में बदलाब आसान नहीं होता। 

अमिताभ कांत एक पत्रिका के आयोजन में बोल रहे थे, जिसका विषय 'आत्मनिर्भर भारत की राह' रखा गया था। अमिताभ कांत ने चीन सु मुकाबला करने के लिए सरकार के आर्थिक सुधारों की पहल की पैरवी कीऔर कृषि सुधार कानूनों को भी वाजिब और जरूरी करार दिया।

पढ़िए क्या कहा अमिताभ कांत ने।

''भारत में कड़े सुधारों को लागू करना बहुत मुश्किल है। हमारे यहां लोकतंत्र कुछ ज़्यादा ही है। पहली बार कोई सरकार हर सेक्टर में सुधारों को लेकर साहस और प्रतिबद्धता दिखा रही है। कोल, कृषि और श्रम सेक्टर में सुधार किए गए हैं। ये बहुत ही मुश्किल रिफ़ॉर्म हैं। इन्हें लागू करने के लिए गंभीर राजनीतिक प्रतिबद्धता की ज़रूरत होती है।''- अमिताभ कांत, सीईओ, नीति आयोग

ऑनलाइन इंवेट में दिए अमिताभ कांत के इस बयान के बाद प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने ट्वीट करते हुए लिखा कि ....

''आलोचना के बाद अमिताभ कांत ने अपने बयान से पल्ला झाड़ लिया. इसके बाद मीडिया में भी स्टोरी डिलीटी कर दी गई लेकिन वीडियो डिलीट करना भूल गए.''

प्रशांत ने अमिताभ कांत का वीडियो भी ट्वीट किया है।

https://twitter.com/pbhushan1/status/1336338686523293697

अमिताभ कांत के बयान के बीद ट्विटर और सोशल मीडिया में उनके बयान की जोरदार आलोचना हो रही है।

अमिताभ कांत के विवादित बयान के बाद जहां कई प्लेटफॉर्म से इस खबर को हटा दिया गया, वहीं इसके लिंक सामने आने पर अब अमिताभ कांत सफाई देने में लग गए हैं। उन्होंने ट्वीट करके लिखा है कि उनके कहने का गलत मतलब निकाला जा रहा है।

https://twitter.com/amitabhk87/status/1336280354672373762

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