भारत की बुजुर्ग आबादी के बारे में भारत सरकार के जरिए करवाए गए सर्वें में गंभीर बिमारियों के शिकार बुजुर्गों के आंकड़े चिंता में डालते हैं।
प्रतीकात्मक तस्वीर

भारत की बुजुर्ग आबादी की फिक्र, सर्वे में 7.5 करोड़ गंभीर बीमारियों के शिकार

नई दिल्ली: भारत में बुजुर्गों पर सरकार की तरफ से कराया गया एक सर्वे चिंता बढ़ाने वाला है।  द लान्जिटूडनल एजिंग स्टडीज इन इंडिया (LASI) की रिपोर्ट बताती है कि भारत में 7.5 करोड़ बुजुर्ग गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हैं। सर्वे में सामने आया है कि 60 साल से अधिक उम्र के हर दो में से एक व्यक्ति किसी ना किसी पुरानी बीमारी से पीड़ित है।

भारत में बुजुर्गों की सेहत का पता लगाने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से एक सर्वे कराया गया है।  'द लान्गिटूडिनल एजिंग स्टडीज इन इंडिया'  (LASI) ने इस सर्वे को अंजाम दिया है। लासी की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 7.5 करोड़ बुजुर्ग या 60 साल से अधिक उम्र के हर दो में से एक व्यक्ति किसी ना किसी क्रॉनिक बीमारी से पीड़ित है। स्टडी में यह भी सामने आया है कि करीब 40 फीसदी बुजुर्ग किसी ना किसी तरह की डिसएबिलिटी से जूझ रहे हैं, जबकि 20 फीसदी से अधिक लोग मानसिक बीमारी से परेशान हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 27 फीसदी लोगों को एक साथ कई बीमारियां हैं। सर्वे करने वाले मुंबई के इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पॉपुलेशन साइंसेज (IIPS) के डायरेक्टर के। एस. जेम्स ने बताया, भारत में लगभग 4.5 करोड़ बुजुर्गों में दिल की बीमारी और हाइपरटेंशन की समस्या है।  लगभग 2 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, जबकि 24 फीसदी बुजुर्गों को चलने, खाने और शौचालय जाने जैसे रोजमर्रा के काम करने में दिक्कत महसूस होती है।

ये सर्वे केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 2016 में शुरू किया गया था। इस सर्वे का मकसद भारत के 60 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 10 करोड़ लोगों के एजिंग पैटर्न और उन्हें होने वाली बीमारियों को ट्रैक करना था। इस सर्वे में हार्वर्ड टी एच चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ और यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ कैलिफोर्निया जैसी संस्था ने भी सहयोग किया है।

1990 में पूरी दुनिया में 60 साल के उम्र के लोगों के लंबे समय तक जीवित रहने का आंकड़ा 9.2 फीसदी था, जो 2013 में बढ़कर 11.7 प्रतिशत हो गया। साल 2050 में इसके 21.1 फीसदी तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।

पूरी स्टोरी पढ़िए