दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर रैली से यातायात बुरी तरह प्रभावित रहा, 8 जनवरी को आठवें दौर की सरकार के साथ प्रस्तावित बातचीत से पहले किसानों ने शक्ति प्रदर्शन किया।
सौ-किसान संगठन

नई दिल्ली: नए कृषि कानूनों के विरोध में 44 दिनों से जारी आंदोलन के बाद किसानों ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए दिल्ली में टैक्टर रैली की। गौरतलब है कि यह ट्रैक्टर रैली पिछली बैठक से पहले होनी थी, लेकिन सरकार के नरम रूख के चलते इसे रद्द कर दिया गया था। 40 किसान संगठनों के इस आंदोलन की मांगों के मद्देनजर सरकार के साथ 7 दौर की बातचीत हो चुकी है। 8 जनवरी को दो बड़े मुद्दों को लेकर बातचीत होनी है, सरकार के नुमाइन्दों की ओर से बार बार कहा जा रहा है कि तीनों कानूनों की वापसी को छोड़ किसान से जुड़े सभी मुद्दों पर बातचीत होगी, लेकिन किसान संगठन तीनों कानूनों की वापसी से कम पर कुछ भी मानने को तैयार नहीं हैं। 

सरकार के साथ बातचीत के बावजूद हल नहीं निकलने से नाराज किसान लंबे वक्त तक प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं। किसानों ने 7 जनवरी को दिल्ली की सीमाओं और पेरिफेरल एक्सप्रेस वे पर ट्रैक्टर मार्च निकाला। किसान पहले यह मार्च बुधवार को ही निकालने वाले थे, लेकिन मौसम को देखते हुए इसे एक दिन के लिए टाल दिया गया। किसानों ने कहा है कि यह 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर आयोजित किए जाने वाले ट्रैक्टर मार्च का पूर्वाभ्यास है। 

किसानों के ट्रैक्टर मार्च की वजह से दिल्ली से आने जाने वाले हाईवे पर यातायात बुरी तरह प्रभावित रहा, सरकार की ओर  से किसानों की रैली के संबंध में कोई टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी  की ओर से कहा गया है कि किसानों को ट्रैक्टर मार्च का आह्वान करने से पहले आठ जनवरी के लिए निर्धारित वार्ता के अगले दौर तक इंतजार करना चाहिए था। 

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि जब बातचीत चल रही हो तो किसी भी आंदोलन का आह्वान करना सही नहीं है। ट्रैक्टर मार्च के लिए किसानों को बुलाने से पहले किसान संगठनों को केंद्र के साथ आठ जनवरी तक की वार्ता का इंतजार करना चाहिए था। पिछले दो दौर की वार्ता सकारात्मक रही है और हम अगले दौर में समाधान को लेकर आशान्वित हैं। 

वहीं केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि जिस तरह कम्युनिस्ट लोग राजनीति के लिए आग में घी डाल रहे हैं। वे नहीं चाहते कि देश में शांति हो। मैं किसान यूनियन के भाईयों से कहना चाहता हूं कि शांति बनाए रखें। सरकार वार्ता के लिए हमेशा तैयार है। 8 जनवरी की बैठक में निश्चित रूप से समाधान निकलेगा।

वहीं किसान संगठनों को आशंका है कि सरकार अगली बैठक में भी कानूनों की वापसी को छोड़कर सारी बातें करेगी और किसानों की मुश्किलें और बढ़े इसका इंतजार करेगी, इसीलिए किसान संगठनों ने एक तरह से किसानों के शक्ति प्रदर्शन के रूप में यह रैली की है, और भारतीय किसान यूनियन की ओर से राकेश टिकैत ने कहा है कि किसान मई 2024 तक आंदोलन के लिए तैयार है।

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