महामारी से जूझते पूरे विश्व को कोरोना वायरस के वैक्सीन तैयार होने का इंतजार था, जिसकी शुरूआती मंजूरी और परिक्षण के पास होते ही भारत सरकार ने वैक्सीन की बाधारहित पहुंच के लिए देशभर में ड्राई रन की पहल की है। 2 जनवरी को तैयारियों की जांच की जाएगी, जिससे किसी भी जगह आने वाली बाधा को दूर किया जा सके।

Delhi: देशभर में कोविड वैक्सीन की पहुंच में आने वाली अड़चनों को दूर करने के लिए 2 जनवरी को ड्राय रन किया जा रहा है। साथ ही इसका मकसद सभी राज्यों में पुख्ता तैयारियों के मद्देनजर तकनिकी, आधिकारिक और व्यावहारिक कठिनाइयों के साथ वैक्सीनेशन की प्रक्रिया को भी चाक चौबंद करना है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय दूसरे चरण में 2 जनवरी को पूरे देश में सभी राज्यों में एक साथ इस ड्राय रन को करवा रहा है।  अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक इस तरह का ड्राय रन हर राज्य के कम से कम दो से तीन जिलों/शहरों में किए जाएंगे।

क्या है ड्राय रन की पूरी प्रक्रिया, क्या होंगे फायदे ?

कोविड वैक्सीन के ड्राय रन में वै्कसीन की सूचना, उसकी पहुंच सुनिश्चित करने से लेकर, उसकी रिकॉर्ड कीपिंग के लिए बनाए गए को-विन (Co-Win) के जरिए डाटा फीडिंग, कोल्ड चेन को मेन्टेन करना, वैक्सीन को मुख्य स्टोरेज से वैक्सीनेशन सेंटर तक पहुंचाना, मानकों के मुताबिक वैक्सीन की सुरक्षा के लिए जरूरी तापमान बनाए रखना, रोगी को वैक्सीन देना, और वैक्ससीनेशन से पहले और बाद में हर तरह के जरूरी परिक्षण करना शामिल होगा। ड्राय रन के बाद पूरे नेटवर्क और उसमें शामिल टीमों के फीडबैक भी लिया जाएगा, जिससे सभी तरह की खामियों को दूर किया जा सके।

वैक्सीनेशन के लिए तैयार किए जा रहे हैं वैकसीनेटर्स 

स्वास्थ्य मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक देशभर में अब तक 96 हजार से अधिक वैक्सीनेटर्स को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। वहीं कुल 2360 वैक्सीनेटर्स को बतौर मास्टर ट्रेनर के रूप में ट्रेनिंग दी गई है। इस तरह का प्रशिक्षण नेशनल ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स कार्यक्रम के तहत दी जा रही है। वहीं 719 जिलों के कुल 57 हजार से अधिक वैक्सीनेटर्स को जिला स्तर पर भी प्रशिक्षण दिया जा चुका है। स्वास्थ्य मंत्रालय की कोशिश है कि देशभर में वैक्सीन देने वालों के प्रशिक्षण की प्रक्रिया को और तेज किया जा सके, जिससे वैक्सीन की पर्यापत उपलब्ध्ता  के साथ अशकी पहुंच हर हिस्से में हो सके, साथ ही वैक्सीनेशन की प्रक्रिया भी तेजी पूरी की जा सके। 

पहले ड्राय रन में तैयार तंत्र का किया गया व्यावहारिक परिक्षण

इससे पहले चार राज्यों असम, आंध्र, पंजाब और गुजरात के चुने हुए शहरों में यह प्रक्रिया अपनाई जा चुकी है। पहले चरण के ड्राय रन में 28 और 29 दिसम्बर को वैक्सिन की पहुंच के साथ ही वैक्सीनेशन के लिए पात्र लोगों को सूचित करना , उन्हें वैक्सीन देना, उनकी निगहबानी करने जैसी प्रक्रियाएं और समय पर अपेक्षित सूचनाएं और मदद मुहैया करवाना शामिल थींं। भले ही वैक्सीनेशन चरणबद्ध ढंग से दिया जाना हो, लेकिन कोरोना महामारी के आंतक के भयावह परिणाम देखने के बाद सभी को वैक्सीन ही बड़ा सहारा नजर आ रही है।

कितनी प्रभावी होगी कोविड वैक्सीन, विशेषज्ञों की अलग अलग है राय

विशेषज्ञों के बीच वैक्सीन और उसके प्रभावों को लेकर कई तरह के मत हैं, लेकिन अन्य कोई उपाय ना होने के चलते इसकी मुखालफत कोई करने के लिए आगे नहीं आ रहा है। कई देशों में कोविड वैक्सीन और मास्क सहित कम्पलीट लॉकडाउन का भी पुरजोर जन विरोध हो चुका है। अभी भी विशेषज्ञों का दावा है कि कोविड वैक्सीन का असर सीमित है, साथ ही एक ही स्ट्रेन के आधार पर निर्मित होने से नए स्ट्रेन से मुकाबले में वैक्सीन कारगर साबित नहीं होगी। इतना ही नहीं मानक के मुताबिक वैक्सीन के लिए कोल्ड चेन को मेन्टेन करना भी जरूरी है। जिसमें खामी आने से भी वैक्सीन निष्प्रभावी हो सकती है।

आयुर्वेद बढ़ाता है रोग प्रतिरोधक क्षमता, वैक्सिन के साथ या उसके बिना, ना छोड़ें प्राकृतिक उपाय

आयुर्वेद के विशेषज्ञों का जरूर यह दावा है कि किसी भी तरह का वायरस और बैक्टीरिया शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी होने पर संक्रमण का शिकार बनाते हैं, इसलिए कोविड प्रोटोकॉल का अनुपालन करते हुए सभी को रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के सभी उपाय आवश्यक रूप से करना ही चाहिए। रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि योग और प्राणायाम, नियमित दिनचर्या, प्राकृतिक आहार, तली भुनी चीजों से परहेज, फल और सब्जियों के साथ सलाद का सेवन करने से। सुबह जल्दी उठने और रात को 9 बजे से पहले सोने से शरीर की प्रणाली (मेटाबोलिक एक्टिविटी) व्यवस्थित रहती है।  अधिक पानी का सेवन, पेट साफ रखने और मन को शांत रखने से सैकड़ों बिमारियों से कोई भी स्वयं को बचा सकता है। घर में मौजूद तुलसी, अदरख, लौंग, काली मिर्च, हल्दी का विभिन्न प्रकार से सेवन रोग प्रतिरोधक क्षमता में अच्छे परिणाम देने वाला साबित हुआ है। 

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