उत्तर प्रदेश में गो उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग कई कदम उठा रहा है।ये सारी कवायदें गोशालाओं और किसानों के साथ ही महिला समूहों की आर्थिक समृद्धि के लिए की जा रही हैं। गो सेवा आयोग गोउत्पादों के प्रचार प्रसार और मानकीकरण के लिए एक विशेषज्ञ कमेटी बनाएगा, जो उत्पादों का मानकीकरण करने के साथ ही आयोग को एक कार्ययोजना तैयार करके देगी। पूरे प्रदेश के लिए गोउत्पादों के लिए एक ब्रान्ड, एकीकृत विपणन की व्यवस्था करेगा।

LUCKNOW:  गो उत्पादों के प्रचार प्रसार और विपणन की केन्द्रीय व्यवस्था बनाने के लिए उ0प्र0 गोसेवा आयोग में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में खादी ग्रामोद्योग बोर्ड और ग्रामिण आजीविका मिशन के प्रतिनिधि, लखनऊ नगर निगम, प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए गो उत्पादक भी सम्मिलित हुए।  दोपहर 2 बजे से शुरू हुई यह बैठक शाम 5.30 बजे तक चली।

गोबर से बनने वाले उत्पादों की बढ़ेगी गुणवत्ता और कलात्मकता 

इस कार्यशाला में गो उत्पादों के निर्माण, मानकीकरण, पैकेजिंग और विपणन के साथ ही नवाचारी प्रयासों के बारे में चर्चा की गई, जिसमें कला विशेषज्ञ मोहन मावा ने गो उत्पादकों को कला जगत से हर संभव मदद दिलवाने का भरोसा दिया, जिससे गोबर से बनने वाले उत्पादों को आकर्षक और रचनात्मक बनाया जा सके। देश के हर हिस्से में बन रहे गो उत्पादों के उत्पादकों से आयोग समन्वय स्थापित कर रहा है, जिससे सभी तरह के प्रयोगों को उत्तर प्रदेश में एक ही जगह मंच दिया जा सके। आयोग का प्रयास की राजधानी में गो उत्पादों का एख बढ़ा सेंटर स्थापित किया जाए, जिसके बाद हर मंडल में ऐसे सेंटर बनाए जाएंगे, जहां सभी तरह के गो उत्पादों की उपलब्ध्ता होगी, साथ ही जरूरी संसाधनों के साथ ही रॉ मैटिरियल और आवश्यक प्रशिक्षण की दिया जाएगा।

खादी ग्रामोद्योग बोर्ड की योजनाओं का गो उत्पादकों और गोशालाओं को मिलेगा विशेष लाभ

कार्यशाला में लखनऊ के जिला ग्रामोद्योग अधिकारी लक्ष्मीकान्त नाग ने खादी ग्रामोद्योग द्वारा संचालित की जा रही योजनाओं के बारे में जानकारी दी। खादी ग्रामोद्योग की योजनाएं पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई हैं। ‘‘प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम’’  कार्यक्रम के अन्तर्गत लाभार्थी को 25 लाख तक का ऋण स्वीकृत किये जाने की व्यवस्था है। लाभार्थी  द्वारा कुल लागत का 10 प्रतिशत अंश वहन किया जाता है तथा 90 प्रतिशत ऋण बैंक देता है। इस योजना में भारत सरकार से 25 प्रतिशत सब्सिडी भी दी जाती है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में लगने वाले उद्योगों पर तीन वर्ष तक अधिकतम 13 प्रतिशत के व्याज की प्रतिपूर्ति किये जाने का भी प्रावधान है। इसके अतिरिक्त ग्रामोद्योग अधिकारी लक्ष्मीकांत नाग ने विभाग द्वारा संचालित स्फूर्ति योजना,  एक ही तरह के उत्पादन से जुड़े समूहों के लिए कॉमन फैसिलिटी सेंटर जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं की जानकारी भी उपलब्ध करायी। साथ ही यह भी बताया कि बोर्ड उत्तर प्रदेश दिवस 24 जनवरी को लखनऊ के शिल्प ग्राम में एख विशाल प्रदर्शनी भी लगाएगा, जिसमें 150 से अधिक स्टॉल लगाए जाएंगे। इसके लिए हर जिले से कम से कम दो- दो शिल्पी, उद्यमियों का चयन किया जाएगा।

ग्रामिण आजीविका मिशन के समूहों को गो उत्पादों के निर्माण से मिला है लाभ, दायरा बढ़ाने पर जोर

 कार्यशाला में सम्मिलित ग्रामिण आजिविका मिशन के प्रतिनिधि नवीन शर्मा ने UPSRLM की उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में ग्रामिण आजीविका मिशन में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली 40 लाख दीदियां अब तक 4 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़ चुकी हैं। जिनमें से अधिकांश समूहों को जीविकोपार्जन के लिए सरकार की ओर से प्रशिक्षण और ऑर्थिक मदद भी दी जा चुकी है। वर्ष 2020 में ही उत्तर प्रदेश में 70 हजारसे अधिक महिलाओं को गोमय उत्पादों से खासा लाभ हासिल हुआ है। जिसकी वजह से ऐसी महिलाओं के बीच गोबर से बनने वाले उत्पादों के संबंध में खासी रूचि पैदा हुई है। इन महिला समूहों में ग्रामीण क्षेत्र में बी0पी0एल0 (गरीबी रेखा से नीचे) की 10-15 महिलाओं तक का एक समूह बनाया जाता है। इस समूह का बैंक में खाता खोले जाने का भी प्रावधान है। इस समूह को क्षेत्र के लीड बेंक के माध्यम से मिठाई के डिब्बे, गोबर के उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण, हथकरघा, तरह तरह के क्राफ्ट वर्क आदि बनाने की ट्रेनिंग भी दिलायी जाती है एवं बैंकों के माध्यम से लोन प्राथमिकता पर दिया जाता है। समिति का कार्यकाल तीन माह पूर्ण होने के बाद समिति की आवश्यकतानुसार रूपये 15 हजार प्रति मेंबर अनुदान दिये जाने का तथा छः माह पूर्ण हो जाने पर रूपया एक लाख दस हजार का अनुदान दिये जाने का प्रावधान है।

गो उत्पादकों की समस्याओं के समाधान के लिए बनेगी समन्वय समीति

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष प्रो. श्याम नन्दन सिंह ने गो उत्पादकों की समस्याओं के सामाधान और आयोग के नेतृत्व में संचालित सभी प्रयासों को सभी गो उत्पादकों , गोशालाओं तक पहुचाने के लिए एक समन्वय समिति बनाने का प्रस्ताव रखा है, जिसके लिए कार्यशाला में आए उत्पादकों की सहमित ले ली गई है। जल्द ही यह समीति आधिकारिक रूप से काम शुरू कर देगी। 

गो उत्पादों के मानकीकरण और प्रचार प्रसार के लिए कार्ययोजना तैयार करने के लिए बनेगी कमेटी

कार्यशाला में आयोग के सलाहकार और वरिष्ठ पत्रकार राधेश्याम दीक्षित के सुझाव पर आयोग ने सभी गो उत्पादकों के उत्पादों के मानकीकरण, उनकी पैकेजिंग और राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर विपणन  नेटवर्क बनाने जाने के लिए जरूरी ढांचागत जरूरतों के की एक कार्ययोजना तैयार करने के लिए कमेटी बनाए जाने पर सहमति जताई। बैठक में सभी गो उत्पादों के लिए कॉमन ब्रैन्डिंग का ढांचा विकसित करने आम सहमित बनी, जिसके संचालन के लिए राज्य, मंडल और जिला स्तर से लेकर ब्लक स्तर तक एक नेटवर्क स्थापित किए जाने का सुझाव गो उत्पादकों ने दिया। 

गो सेवा आयोग बनाएगा सिंगल विन्डो सिस्टम, गो उत्पादकों और गोशालाओं को एक ही जगह मिलेगी सारी जानकारी

गोशालाओं और गो उत्पादकों की आवश्यकताओं और समस्याओं के समाधान के लिए उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग एक सिंगल विन्डो सिस्टम विकसित करने पर भी जोर दे रहा है, जहां से सभी तरह की जानकारी हासिल हो सके। विभिन्न विभागों की योजनाओं के लिए गोपालकों, गोप्रेमियों को जगह जगह भटकना ना पड़े। 

नव संवत्सर और सरस्वती पूजन के लिए गो उत्पादक बनाएं मां सरस्वती की गोमय प्रतिमांएं

उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष ने गो उत्पादकों से अपील की है कि दीपावली में गोमय दीपों और मूर्तियों के अच्छे प्रचार प्रसार से गो उत्पादों के प्रति जनमानस में रूचि बढ़ी है, इसलिए अब अंग्रेजी नववर्ष के साथ ही नवसंवत्सर की तैयारियों में  लग जाएं। अब गो उत्पादक मां सरसवती की गोमय प्रतिमाएं, मूर्तियां और पूजन सामग्री का निर्माण करने पर जोर दें। साथ आवाहन किया कि गोमय उत्पादों की गुणवत्ता और उनको आकर्षक बनाया जाए, जिससे बाजार में इनकी डिमांड बढ़े, और जनमानस चाव से ऐसे उत्पादों को खरीदे। 

मोबाइल रेडिएशन से मुक्ति दिलाने वाले विशेष गोमय पाउच के वैज्ञानिक परिक्षण का प्रयास

गो उत्पादों के 40 सालों से अधिक समय से नवाचारी प्रयोग करने वाले कानपुर की भौती गोशाला के संरक्षक पुरूषोत्म तोषनीवाल ने मोबाइल के बढ़ते उपयोग से रेडिएशन के बढ़ते खतरे से आगाह करते हुए बताया कि गोबर से बनाए गए विशेष पाउच मोबाइल के रेडिएशन को कम करने में सक्षम हैं। जिसका कई विशेषज्ञ संस्थाओं ने परिक्षण भी किया है, अब केवल इसके मानकीकरण के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके बाद ऐसे पाउच और एन्टी रेडिएशन शीट्स का निर्माण बड़े पैमाने पर शुरू किया जा सकेगा। 

 इस कार्यशाला में प्रमुख रूप से डा0वीरेन्द्र सिंह सचिव, उ0प्र0 गोसेवा आयोग, डा0पी0के0 त्रिपाठी, पूर्व सचिव, उ0प्र0 गोसेवा आयोग, डा0 संजय यादव, गोसेवा अधिकारी, उ0प्र0गो0से0आ0, डा0 शिव ओम गंगवार, समंवयक, कार्यशाला, डा0 प्रतीक सिंह विशेषकार्याधिकारी, उ0प्र0गो0से0आ0, डा0 नरजीत सिंह, विशेषकार्याधिकारी, उ0प्र0गो0से0आ0 एवं निकटवर्ती जनपदों की गोशालाओं के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। कार्यशाला का संचालन वरीष्ठ पत्रकार/गो-प्रेमी, समाज सेवी एवं यूनाइट फाउण्डेशन के उपाध्यक्ष श्री राधेश्याम दीक्षित ने किया।

पूरी स्टोरी पढ़िए